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साखी |5|

मिनखा देही है अणमोली भजन बिना वृथा क्यूं खोवे।

भजन करो गुरू जम्भेश्वर का, आवागण का दुखणा खोवे।

गर्भवास में कवल किया था, कवल पलटे हरि विमुख होवे।

बालपणे बाला संग रमियो, जवान भयो नारि बस होवे।

चालीसां में तृष्णा जागी, मोह माया में पड़ कर सोवे।

बेटा पोता और पड़पोता,हस्ती घोड़ा बग्घी होवे।

धन कर ऐश करूं दुनियां में, मेरे बराबर कोई न होवे।

गर्व गुमान करै मत प्राणी गर्व कियो हिरणाकुश रोवे।

गर्व किया लंकापति रावण सीता हड़कर लंका खोवे।

सच्चा पायक रामचंद्र का हनुमन बलकारी होवे।

तन में तीरथ न्हाय त्रिवेणी, ज्ञान बिना मुक्ति नहीं होवे।

ज्ञान नहीं बन के मृग ने, किस्तूरी बन बन में टोवे ।

अड़सठ तीरथ एक सुभ्यागत, मात पिता गुरू सेवा से होवे।

दोय कर जोड़ ऊदो जन बोले आवागण कदे न होवे।



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