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भजन |7|

संगरी सहेल्यां रलमिया चाली आपा मेले जायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥टेक॥

धोरे ऊपर हरि कंकेड़ी झिगमिग जोत जगायसा ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥।

अगुण पेड़ी चढ़ धोक लगायसां हुय उतराधी आयासां ऐ जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥॥

गोरी गायरो घिरत ले जायसां, गुरूजी जीत जायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥॥

फागण बदी तेरस और चवदस, शिवरात्रि रो जागण लगायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥॥

दिन ऊगेरी भावज आपां, गुगल घिरत चड़ायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥।

भगवीं टोपी काली माला, नित उठ दरसण करस्यां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥।

चिड़िया गेरी मोर सुवटिया, बाने चूण चुगायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥॥

हरि चरणा में कालुराम बोले आपा रलमिल जायसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां॥॥










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