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भजन |6|

म्हाने गुरूजी मिलण रो लागो कोड़, समराथल धोरे जावला टेक

गुरूजी मिलण रो कोड लागा रह्‌यो जास्यां धाम मुकाम,कई जनमारा पाप काटस्यां पावाला मुक्ति धाम।

आमावस रो वरत राखस्यां धर जम्भेश्वर ध्यान, माटी काडा नाडियेरी पावाला मुक्ति धाम॥॥।

थारे जातरी आवे घणेरा म्हाने भूलज्यो नाय समराथल धोरे री माटी लेवांला अंग में रमाय॥॥

चरण कमल रा थारा खड़ाऊ पड्या पीपासर माय,चोलो थारो पड्यो जांगुल टोपी हैं धाम मुकाम॥

जाम्भेलाव थारो जम्भ सरोवर थे खुद आप खुदायो। चेत भादवे मेलो भरीजे मन वांछित फल पावैं॥।

फोग कंकेड़ी कुंभठा रो हैं धोरे पर बाग, उण धोरे रा दरसण करस्यां बारम्बार नन्दराम॥।।












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